रहस्यमयी सफर – अनजान रहस्यमयी टापू, – खौफनाक कहानी और रहस्यमयी सफ़र
डबडबा टापू की भूमि पर जहाँ वीरता और बलिदान की कहानियाँ कदम-कदम पर नज़र आती थी, वहीं अब कदम-कदम पर नज़र आता है, रहस्य और रोमांच से परे एक ऐसा अद्भुत संसार जो अपनी बर्बरता की दास्तां ख़ुद कहता है।
वहीं दूसरी तरफ़ है कालुभर टापू, जहाँ शाम के साये गहराने लगते हैं तो हवा में एक रहस्यमयी-सी सरसराहट घुल जाती है। अपनी ही आहट से हृदय की धड़कने रुकने को अक्सर विवश हो जाती है।
अटल के घुमक्कड़ी के शौक ने उसे निशा से मिलवाया, जिसके मोहपाश में फँसकर वह पहुँच गया, हर चौबीस साल में जलमग्न हो जाने टापुओं पर। यहाँ उसका सामना हो रहा था ऐसे अतीत से, जिसके वर्तमान में खुद को पाकर, वह अपने भविष्य को लेकर चिंतित हो चला था।
कैसा था ये रहस्यमयी सफर ? क्या अटल को मिल पाई थी निशा? आखिर कौन थी ये निशा? क्या निशा कोई थी या थी कोई मरीचिका?







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