झूठियापा
झूठ बोल कर बर्बाद होना आसान है, सच बोल कर कामयाब होना मुश्किल है।
ये बात मयूर को तब समझ आयी जब उसके घरवालों ने , गर्लफ्रेंड ने , दोस्तों ने यहाँ तक सबने उसका साथ छोड़ दिया। क्योंकि झूठ का साथ हर कोई नहीं देता, सब साथ देते है सच का। जैसे मुजरिम का वकील भी पहले उससे सारी सच्चाई पूछता है तब साथ देता है।
आज से दस साल पहले जहां मयूर के पास चलने के लिये तीन रास्ते थे। पच्चीस का होते ही वह तीन रास्ते भी बंद हो गये।
जहाँ पहला रास्ता था जहां उसके घरवाले चलाना चाहते थे।
दूजा वह जहां उसके दोस्त चल रहे थे।
तीज़ा वह जहां वो खुद चलना चाहता था।






Reviews
There are no reviews yet.